बच्चों के खिलाफ यौन अपराध के लिए मौत की सजा, POCSO एक्ट में बदलाव को सरकार ने दी मंजूरी


Child Abuse

बुधवार, 10 जुलाई 2019 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के लिए सजा को और सख्त बनाने के लिए POCSO अधिनियम में संशोधन को मंजूरी दी ।

केंद्रीय मंत्रिमंडल के अधिकारियों ने कहा कि POCSO अधिनियम में संशोधन को मंजूरी दी गई है। इसके तहत बच्चों के खिलाफ अपराध और नाबालिगों के यौन शोषण के लिए मौत की सजा शामिल है।

प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (POCSO) एक्ट में और भी संसोधन के प्रावधान है, जैसे चाइल्ड-पोर्नोग्राफी पर अंकुश लगाने के लिए जुर्माना और कारावास का प्रावधान।

सरकारी अधिकारीयों के अनुसार अधिनियम में शामिल कठोर दंडात्मक प्रावधानों के बदौलत बाल यौन शोषण की प्रवृत्ति को हतोत्साहित किया जा सकता है।

गंभीर रूप से शिकार बच्चों के हितों के रक्षा और सुरक्षा के लिए POCSO एक बेहतर कानून है, इसमें और संसोधन का उद्देश्य बाल शोषण और उसके दंड के पहलुओं के बारे में स्पष्टता स्थापित करना है।

सरकारी बयानों के अनुसार बच्चों पर सेक्सुअल एब्यूज के लिए POCSO एक्ट, 2012 के सेक्शन 2, 4, 5, 6, 9, 14, 15, 34, 42 and 45 में संशोधन किए जा रहे हैं।

“धारा – 4, 5 और 6 में बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए यौन उत्पीड़न या इस तरह के यौन उत्पीड़न में लिप्त कोई भी सरकारी या पुलिस ऑफिसर को भी दंड देने के साथ मौत की सजा सहित कड़े दंड का विकल्प प्रदान करने का प्रस्ताव किया गया है।”

“बाल पोर्नोग्राफी को रोकने के लिए POCSO एक्ट, 2012 की धारा -14 और धारा -15 में भी संशोधन किया जाना प्रस्तावित है। इसमें किसी भी उद्देश्य के साथ बच्चे को शामिल करने वाली अश्लील सामग्री को नष्ट या नष्ट नहीं करने या उसकी रिपोर्टिंग नहीं करने पर जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है। इसे किसी भी प्रकार से सोशल मीडिया या अन्य तरह से शेयर करने या प्रसारित करने पर भी कठोर दंड का प्रावधान है।” सरकार ने कहा।


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