कारगिल की कहानी: आर्मी ड्राइवर, जिसने अकेले ही 29 पाकिस्तानियों को मार गिराया


Kargil Hero Ram Ratan Mahto

Kargil Hero Hawaldar Ram Ratan Mahto: रिटायर हवालदार राम रतन महतो, 56, कारगिल युद्ध के दौरान ड्राइवर थे। इस दिग्गज के नाम पर एक दो नहीं बल्कि 29 पाकिस्तानियों के मार गिराने का रिकॉर्ड है।

ड्राइवर के तौर पर हवालदार राम रतन महतो को सैनिको को युद्ध क्षेत्र तक ढोने का था। अपने साहसिक कारनामे से रातों रात युद्ध के हीरो भी बन चुके थे। पाकिस्तानियों के मारने के साथ ही अपनी बटालियन को भी दुश्मनों से बचाया था।

कारगिल युद्ध को याद करते हुए उस समय की बात बताते है “वे मोटर गेराज में अपने लाइट मशीन गन साथ अकेले थे। इसी बीच करीब रात के 12.30 बजे उन्होंने दुश्मनो को यूनिट के तरफ बढ़ते हुए देखा। मुझे लगा कि अगर वे यूनिट तक पहुंचने में सफल रहे, तो वे गंभीर नुकसान पहुंच सकते हैं। बस दिमाग को संतुलित कर हमला बोल दिया और रुका तब, जब तीनों गोलियों के बक्से खाली हो गये। मैं उनके टुकड़ी में सभी 29 लोगों को मारने में कामयाब रहा।”

देर रात को, मरे हुए लोगो किन शिनाख्त के बाद, राम रतन महतो हीरो बन चुके थे। वे याद करते हुए बताते है “सीनियर ऑफिसर ने उन्हें अपने कंधे पर उठा लिया नाचना शुरू कर दिया। इसके अलावा राम रतन महतो बताते है कि वे कुल 18 बार दुश्मनो के हमले से बचाया और 19 बार में वे घायल हो गए।

22 जून 1999 को वे जब मोटर गेराज में अकेले थे, उस दौरान हमले में वे घायल हो गए। स्प्लिंटर्स ने बाएं पैर को मारा और मेरी आंत को नुकसान पहुंचाया। लेकिन वे अपने ट्रक तक पहुंचने में कामयाब रहे और उसे 3 किलोमीटर तक चलाकर फील्ड एम्बुलेंस तक पहुंच गये। फिर वहां से उन्हें बंकर में ले जाया गया। पूरी रात के बाद अगले दिन हेलीकाप्टर से श्रीनगर ले जाया गया।

हवालदार राम रतन महतो बताते हैं “बाद में, जब मैंने अपनी आँखें खोलीं, तो पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और तत्कालीन सेना प्रमुख वेद प्रकाश मलिक मेरे पास खड़े थे।” स्वस्थ होने के बाद राम रतन के अनुरोध के बाद फिर से कारगिल में पोस्टिंग हो गई।

Image Credit: The New Indian Express, हवालदार राम रतन महतो का कच्चा मकान

हवालदार राम रतन महतो, 1889 प्रकाश रेजिमेंट के साथ द्रास सेक्टर के बिंबात में तैनात थे। वे परिवार के साथ सिमडेगा जिले के भदीकुदर गाँव में रहते थे। सेवा के दौरान हीं ज़मीन खरीदकर कच्चा मकान बनाया था, उसी में अभी रहते हैं।

फ़िलहाल गुमला में 2016 से राम रतन प्राइवेट सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करते हुये जीवन यापन कर रहें हैं।

Source: NewIndianExpress


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